
Hadith #112
Hindi (हिन्दी)जो मुझे अपने दो जबड़ों और दो पांवों के दरमियान की चीज़ों (ज़बान और शर्मगाह) की (हिफाज़त की) ज़मानत दे, मैं उसके लिए जन्नत का ज़ामी हूॅं।
Reference: صحيح البخاري، كتاب الرقاق، باب حفظ اللسان، الحدیث 6474

जो मुझे अपने दो जबड़ों और दो पांवों के दरमियान की चीज़ों (ज़बान और शर्मगाह) की (हिफाज़त की) ज़मानत दे, मैं उसके लिए जन्नत का ज़ामी हूॅं।
Reference: صحيح البخاري، كتاب الرقاق، باب حفظ اللسان، الحدیث 6474